
कृषि विज्ञान केन्द्र, हरिहरपुर, वैशाली की स्थापना ८ मार्च १९९७ को भारतीय अनुसंधान केन्द्र, नई दिल्ली के द्वारा हुआ । यह राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार के अन्तर्गत है । वैशाली जिले में इस केन्द्र की स्थापना इसलिए की गई कि यहाँ की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बहुत अच्छी है जो खेती के लिए उपयुक्त है, विशेषकर औद्यानिक फसलों के लिए ।
यह कृषि विज्ञान केन्द्र, वैशाली राष्ट्रीय उच्चपथ संख्या ७७ पर पटना से २५ कि.मी. तथा मुजफ्फरपुर से ५० कि.मी. पर है । इसके उत्तर-पूर्व में मुजफ्फरपुर जिला, दक्षिण में गंगा नदी, पूर्व में समस्तीपुर जिला तथा पश्चिम में गंडक नदी है ।
| अक्षांस | : | 25.00 से 25.30 | |
| उन्नतांश | : | 84.00 से 85.00 | |
| मिट्टी | : | जलोढ़, उर्वर | |
| कृषि की स्थिति | : | उत्तरी पश्चिमी जलोढ़ समक्षेत्र | |
| मुख्य फसल | : | केला, आम, लीची, फूलगोभी, इत्यादि | |
| दूसरे फसल | : | धान, गेहूँ, मक्का, तम्बाकू | |
| जलवायु | : | आद्र, उष्णकटिबंधीय मानसून | |
| वर्षा (मि.ली.) | : | 1,050 मि.ली. | |
| तापमान | : | ७¤ सेंटिग्रेड से ४५¤ सेंटिग्रेड | |
| मिट्टी का पी.एच. | : | 8.0 से 9.5 | |
| मिट्टी की गुणवत्ता | : | बलुआही दोमट मिट्टी |
| प्रयोगशाला में तैयार किये गये तकनीकों को कृषक के खेतों पर जाँच हेतु उपलब्ध कराना ताकि यह पता किया जा सके कि वह तकनीक कृषक के खेतों लायक है या नहीं । | ||
| प्रसार पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देना ताकि उन्हें कृषि के क्षेत्र में नई-नई तकनीकों से अवगत कराया जा सके । | ||
| कृषकों एवं ग्रामीण युवाओं के लिए अल्पावधि एवं दीर्घावधि कृषि एवं उससे संबंधित अन्य क्षेत्रों में व्यवसायिक प्रशिक्षण देना । इसे वे स्वरोजगार हेतु अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को ऊपर ला सकते हैं । | ||
| विभिन्न फसलों पर प्रथम पंक्ति प्रत्यक्षण कराना ताकि उपज एवं इससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी फीडबैक के रूप में मिले । | ||
| केले के धम्ब से बने रेशे एवं इससे बने उत्पादों का व्यवसायीकरण करना । | ||
| जीरो टिलेज खेती के अन्तर्गत अधिक से अधिक भूमि को लाना । | ||
| बीज ग्राम बनाकर महत्वपूर्ण सब्जियों के बीजों की पैदावार को बढ़ावा देना । | ||
| बीजजनित रोगों की रोकथाम के लिए बीजोपचार की प्रक्रिया को कृषकों के बीच बढ़ावा देना । | ||
| किसानों के अन्दर एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन की जागरूकता ला कर जैविक खेती को पूरे जिले में प्रचार-प्रसार करना । | ||
| ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आमदनी बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण देना । |
कृषि विज्ञान केन्द्र, हरिहरपुर, वैशाली (बिहार)